बॉलीवुड इंडस्ट्री का छिपा राज, पर्दे के पीछे होता है कितने घटिया काम

लेकिन चकाचौंध से भरी इस इंडस्ट्री में पर्दे के पीछे कई ऐसी सच्चाई छुपी हैं, जिनका सामना किसी न किसी एक्टर/एक्ट्रैसेस को कभी न कभी करना ही पड़ता है। आज हम अापको कुछ एेसी ही सच्चाई से रू-ब-रू करवाने जा रहे है।


अगर एक सर्वे के आंकड़ों पर गौर करें तो 35% फीमेल कैरेक्टर्स ऐसे होते हैं, जिन्हें कुछ न्यूडिटी के साथ दिखाया जाता है। जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के बाद इंडियन फ़िल्में तीसरे नंबर पर आती हैं, जहां एक्ट्रैसेस की सैक्सी इमेज को दिखाया जाता है।


कॉम्प्रोमाइज करने का बनाया जाता है दबाव

बिना आइटम नंबर के आजकल फ़िल्में बहुत ही कम देखने को मिलती है। एेसे ही कुछ स्टार्स कास्टिंग काउच के शिकार होते है। कुछ कास्टिंग डायरैक्टर्स न्यूकमर्स को बड़ा रोल दिलाने का लालच देकर कॉम्प्रोमाइज करने का दबाव बनाते हैं।

फ्लॉप होना किसी पाप से कम नहीं

फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर फेयर कलर को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसा ही कुछ मनोज बाजपेयी के साथ फिल्म 'जुबैदा' के दौरान हुआ था। क्रिटिक्स ने साफ़तौर पर कहा था कि वे कहीं से भी प्रिंस नहीं लग रहे थे। पिछले दिनों कंगना रणावत ने इस बात का दावा किया था कि बॉलीवुड में भाई-भातीजावाद ज्यादा देखने को मिलता है। इसे लेकर करन जौहर उनका विरोध कर रहे थे। बॉलीवुड में किसी एक्टर के फ्लॉप होने को पाप की तरह देखा जाता है। ऐसे एक्टर्स को लोग अचानक इग्नोर करना शुरू कर देते हैं।

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